Krishna Bhujanga Prayata Ashtakam – भुजङ्गप्रयाताष्टकम्

सदा गोपिकामण्डले राजमानं
लसन्नृत्यबन्धादिलीलानिदानम् ।
गलद्दर्पकन्दर्पशोभाभिदानं
भजे नन्दसूनुं सदानन्दरूपम् ॥ १ ॥

व्रजस्त्रीजनानन्दसन्दोहसक्तं
सुधावर्षिवंशीनिनादानुरक्तम् ।
त्रिभङ्गाकृति स्वीकृतस्वीयभक्तं
भजे नन्दसूनुं सदानन्दरूपम् ॥ २ ॥

स्फुरद्रासलीलाविलासातिरम्यं
परित्यक्तगेहादिदासैकगम्यम् ।
विमानस्थिताशेषदेवादिनम्यं
भजे नन्दसूनुं सदानन्दरूपम् ॥ ३ ॥

स्वलीलारसानन्ददुग्धोदमग्नं
प्रियस्वामिनीबाहुकण्ठैकलग्नम् ।
रसात्मैकरूपाऽवबोधं त्रिभङ्गं
भजे नन्दसूनुं सदानन्दरूपम् ॥ ४ ॥

रसामोदसम्पादकं मन्दहासं
कृताभीरनारीविहारैकरासम् ।
प्रकाशीकृतस्वीयनानाविलासं
भजे नन्दसूनुं सदानन्दरूपम् ॥ ५ ॥

जिताऽनङ्गसर्वाङ्गशोभाभिरामं
क्षपापूरितस्वामिनीबृन्दकामम् ।
निजाधीनतावर्तिरामातिवामं
भजे नन्दसूनुं सदानन्दरूपम् ॥ ६ ॥

स्वसङ्गीकृतानन्तगोपालबालं
वृतस्वीयगोपीमनोवृत्तिपालम् ।
कृतानन्दचौर्यादिलीलारसालं
भजे नन्दसूनुं सदानन्दरूपम् ॥ ७ ॥

धृताद्रीशगोवर्धनाधारहस्तं
परित्रातगोगोपगोपीसमस्तम् ।
सुराधीशसर्वादिदेवप्रशस्तं
भजे नन्दसूनुं सदानन्दरूपम् ॥ ८ ॥

इति श्रीहरिरायाचार्य विरचितं भुजङ्गप्रयाताष्टकम् ।

Facebook Comments

You may also like...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Download Stotra Nidhi mobile app